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Monday, May 26, 2014

Tips for Odia Journalism | By- Sasmita Paikaray

Sasmita Paikaray is an alumnus of Odia Journalism Department (2013-14) of IIMC Dhenkanal. She landed up in a job through campus placement at The Nirbhaya newspaper, Bhubaneshwar.

Sunday, April 22, 2012

कॉमन सेंस बेहद ज़रूरी है

एनडीटीवी के एसोसिएट पॉलिटिकल एडिटर अखिलेश शर्मा देश के जाने-पहचाने राजनीतिक पत्रकार हैं. इन्होंने दैनिक भास्कर से पारी की शुरुआत की थी. एनडीटीवी से पहले टीवीआई, बीबीसी-लंदन और आजतक में काम कर चुके हैं.
पत्रकार बनने के लिए सबसे ज़रूरी चीज़ है कॉमन सेंस का होना. न तर्कशास्त्री होना, न मनोवैज्ञानिक होना, न भूगर्भशास्त्री होना, न गणितज्ञ होना. आपके पास अगर कॉमन सेंस है तो आपको पत्रकारिता तो छोड़िए जीवन के किसी चरण में कभी दिक्कत नहीं आएगी.

कॉमन सेंस कोई ऐसा विषय नहीं है जिसके लिए रात-रात भर जाग कर पढ़ाई करनी होती है. ये सेंस मनुष्य के जीवन में विकास के साथ विकसित होता चला जाता है.

मैं इस विषय को अब ज़्यादा नहीं उलझाऊँगा. कॉमन सेंस से मेरा मतलब है अपने आस-पास हो रही घटनाओं के बारे में प्रकृतिजन्य उत्सुकता होना और उनके बारे में जानकारी होना. कोई घटना अगर हो रही है तो क्यों हो रही है, इसका क्या परिणाम होगा, ये सामान्य कौतूहल है जो आपके कॉमन सेंस में बढोत्तरी करता है.

यहाँ इस कॉमन सेंस को जनरल नॉलेज से न जोड़ें. बल्कि अपनी आँखें खुली रखना, अपने कान खुले रखना. आसपास घटित हो रही घटनाओं को समझना, उनका मनन करना आपके कॉमन सेंस को बढ़ाता है.

मैं इस विषय पर ज़ोर इसलिए दे रहा हूँ क्योंकि जब 1993 में लिखित परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद मैं आईआईएमसी में इंटरव्यू देने आया तब मेरे साथ एक बहुत मज़ेदार घटना हुई.

मैं आईआईएमसी कैंटीन में अपने वरिष्ठ दीपक चौरसिया के साथ था. उनके साथ उनके एक अन्य साथी थे जो आईआईएमसी से कोर्स कर चुके थे. दोनों की आपस में बात हो रही थी कि घर शिफ्ट करना है और उसके लिए कुछ फर्नीचर की ज़रूरत है.

तब उनकी बातचीत में पंचकुइयाँ रोड का ज़िक्र आया. ये बात हुई कि दिल्ली में फ़र्नीचर के लिए सबसे बेहतरीन जगह वही है. मैं दिल्ली पहली बार आया था और मेरे लिए ये नई जानकारी थी.

संयोग की बात है, अगले दिन इंटरव्यू में मुझसे इंदौर में मेरे पते के बारे में पूछा गया. मैंने इंदौर में अपना पता पंचकुइयाँ रोड ही लिखा था. प्रोफेसर जांगिड़ ने मुझसे पूछा कि इंदौर का ये पंचकुइयाँ रोड़ किस बात के लिए मशहूर हैं. मैंने कहा, श्मशान घाट के लिए. फिर उन्होंने पूछा दिल्ली में भी एक पंचकुइयां रोड है वो किसलिए मशहूर है. मैंने झट जवाब दिया, फ़र्नीचर के लिए. इसके बाद इंटरव्यू ख़त्म.

वैसे ये सिर्फ़ संयोग भर है. लेकिन इस घटना ने मुझे पत्रकारिता का पहला पाठ पढ़ा दिया.

मैं अगर 15 साल पहले के छात्रों को सलाह दे रहा होता तो मैं ये कहता की वो टीवी देखें. भाषा, उच्चारण, ख़बर के चयन, संवाददाताओं के रिपोर्टिंग के तरीके को देखने के लिए. लेकिन अफ़सोस अब हिंदी के चैनलों पर ये सारी चीज़ें नदारद हैं. अंग्रेज़ी के चैनलों को देख कर ही ख़बरों के चयन, प्रस्तुतिकरण आदि की जानकारी हो सकती है. अख़बार हिंदी और अंग्रेजी दोनों के पढ़ें. हिंदी के अख़बारों में अभी पत्रकारिता ज़िंदा है.

अनुवाद प्रश्नपत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. इस पर ध्यान दें. ये ध्यान रखें कि अंग्रेज़ी के पत्रकार लंबे-लंबे वाक्य लिखना अपना ज्ञान दिखाने का एक ज़रिया मानते हैं. लेकिन अनुवाद करते वक़्त हिंदी में छोटे-छोटे वाक्य बनाएं. क्योंकि हिंदी की ये सुंदरता है.

ये ध्यान रखें कि जिन विषयों पर आपसे लंबी और छोटी टिप्पणियाँ ली जाती हैं वो दरअसल आपके सामान्य ज्ञान को परखने के साथ आपकी विचारधारा का अंदाज़ा लगाने के लिए भी होती है. इसीलिए ये ध्यान रखें कि आप कॉलेज के कैंटीन में दोस्तों से बहस नहीं कर रहे हैं बल्कि देश के सबसे प्रतिष्ठित पत्रकारिता संस्थान की प्रवेश परीक्षा में लिख रहे हैं. इसलिए आपके विचारों में संतुलन बेहद आवश्यक है चाहे आपकी विचारधारा जो भी हो.

ध्यान रहे परीक्षक भाषण पसंद नहीं करते. इसलिए संक्षेप में अपनी बात रखें. जिन विषयों के बारे में जानकारी नहीं हैं उन्हें बिल्कुल न छुएं. पत्रकारिता का एक सिद्धांत ये भी है- When in doubt, keep it out!!

इंटरव्यू में भी लंबी-लंबी छोड़ने से बचें. जितना पूछा गया है सिर्फ़ उतना ही जवाब दें. जवाब आत्मविश्वास से भरपूर होना चाहिए. इंटरव्यू लेने वाले वरिष्ठ पत्रकार होते हैं. वो दुनिया देख चुके होते हैं इसलिए उन्हें चलाने की कोशिश न करें. अगर कोई जवाब नहीं आता है तो माफ़ी मांग लें. आपका कोई नुकसान नहीं होगा.

और सबसे बड़ी बात. ये सवाल देर-सवेर ज़रूर पूछा जाएगा. आप पत्रकार क्यों बनना चाहते हैं. ख़ासकर आज पत्रकारिता की जो हालत है उसे देख कर तो ये सवाल हर आदमी आपसे पूछ रहा होगा. इसलिए बजाए समाज परिवर्तन, देश सेवा जैसी बड़ी-बड़ी बातें करने के साफ़-साफ़ बोल दें कि ये एक अच्छा कैरियर ऑप्शन है और मीडिया के क्षेत्र में जिस तरह से फैलाव हो रहा है उसके बाद आपको ये ठीक लगता है कि इसमें हाथ आज़माया जाए.


शुभकामनाओं के साथ
अखिलेश शर्मा
हिंदी पत्रकारिता, 1993-94

Wednesday, April 18, 2012

दुनियादारी के जहां में दस्तक देने से पहले

पेशे से मूलतः किसान विभुराज चौधरी हिन्दी पत्रकारिता विभाग के 2008-09 बैच के छात्र रहे हैं. कैंपस से निकलने के बाद समाचार एजेंसी भाषा के साथ जुड़े और फिर दिल्ली विश्वविद्यालय से कानून की पढ़ाई भी शुरू कर दी. फिलहाल दिल्ली छावनी परिषद के प्रवक्ता हैं.

जर्नलिज्म के स्कूलों में दाखिले के वक्त होने वाले इंटरव्यू और करियर शुरू करने के लिये खबरिया चैनलों और अखबार के दफ्तरों की खाक छान रहे नये लड़कों से ये सवाल अक्सरहां पूछा जाता है कि आप जर्नलिस्ट क्यूं बनना चाहते हैं?

इब्तिदा यहीं से करते हैं. क्यूंकि इक क्लासिक जवाब मौके की मारामारी में आपको इक मौका दिला सकती है इसलिये बेहतर है कि ये सवाल किसी और से सुनने से पहले खुद से करें. खुद को लाजवाब करें. यकीन मानिये दोस्तों! आधी मुश्किल आसान हो जायेगी.

जर्नलिज्म दुनियादारी से ज़ुदा चीज नहीं है. कोई रॉकेट साइंस भी नहीं है. बस दुनियाबी बातों को देखने का नजरिया भर है. आपकी संवेदनाएं आपसे सवाल करती हैं या नहीं और आप उन सवालों को दुनिया वालों से पूछते हैं या नहीं. बस इतना ही तो तय करना होता है इक जर्नलिस्ट को. माध्यम चाहे जो हो, टीवी हो, अखबार हो, पत्रिका हो या फिर न्यूज एजेंसी.

आईआईएमसी में दाखिला इक अलग तरह की चुनौती है. नामुमकिन नहीं पर मुश्किल जरूर है. रिटेन और फिर इंटरव्यू. चूंकि ये पेशा लिखने-पढ़ने का है इसलिये रिटेन क्वालीफाई करना लाजिमी है.

हम किसी दिये हुए टॉपिक पर जो कुछ भी लिखते हैं, वह कितना कन्विंसिंग है, कितना कैलकुलेटेड है और कितना सब्जेक्ट ओरियेंटेड है, रिटेन इक्ज़ाम में यही देखा जाता है. अगर लिखने के लिये कन्टेंट ज्यादा न हों तो तरीके से बातें बनाना भी किसी आर्ट से कम नहीं होता पर उसमें इक फ्लो, इक प्रवाह तो होना चाहिये न. अगर आप बात बनाने के उस्ताद नहीं हैं तो इस परीक्षा में ऐसा करके हाथ न जलाएं.

अखबारों में छपने वाले फीचर्स यही तो होते हैं. पर इससे पहले पढ़ने की आदत होनी चाहिये. किताबों से दोस्ती की चाहत रहे. आप जो जीते हैं और जो महसूस करते हैं, उसे लिखें. दुनिया में कहाँ क्या घट रहा है, उससे बाखबर रहें. उस पर अपनी राय बनाएं और तर्क के साथ उसे लिखें.

इक और बात जिसे समझना जरूरी है. कोई संस्थान प्लेसमेंट की गारंटी नहीं देता है और आईआईएमसी में तो कोई प्लेसमेंट सेल भी नहीं है पर इसकी अपनी इक अनकम्पेयेरेबल ब्रांड इक्विटी है. यहां हुनरमंद हाथों को काम मिल जाता है. काबिल लोगों के पास काम चलकर आता है. जॉब मार्केट के अपने फंडे होते हैं. आईआईएमसी आपको जॉब मार्केट में पहुंचा देगा, इसकी गारंटी है पर अपने कदम टिकाये रखना आपकी अपनी जिम्मेदारी होगी.

सबसे अच्छा कुछ नहीं होता है. सब तुलनात्मक है, सापेक्ष है. जो सबसे अच्छा होता है, वो आदर्श कहलाता है. आदर्श एक काल्पनिक स्थिति है. हम आदर्श की ओर बढ़ते हैं और कल्पनायें साकार हो जाती हैं.

जीवन ऐसे ही इक सफर का नाम है. आप नये सफर की तैयारी कर रहे हैं. बेहतर कल के लिये शुभकामनायें.


विभुराज चौधरी

मन के हारे हार है, मन के जीते जीत

आरटीवी 2005-06 बैच के अमित कनौजिया ज़ी बिज़नेस में हैं.
मन के हारे हार है, मन के जीते जीत. यह अल्फाज़ काफी अहमियत रखता है. ये फलसफा सिर्फ IIMC प्रवेश परीक्षा में ही काम नहीं आएगा बल्कि तब भी जब आप पत्रकार बनकर मीडिया के मैदान में कदम रखेंगे.

दोस्तों जिस दिन हम ये तय करते हैं कि हमें पत्रकार बनना हैं. यकीं मानिए हम, दुनिया के दूसरे लोगों से अलग होने की राह पर बढ़ते हैं. यूं तो चुनौतियां दूसरे पेशे में भी कम नहीं लेकिन बतौर पत्रकार आप दिन-रात चुनौतियों का सामना करते हैं. ख़ास तौर पर टीवी पत्राकिरता में 24x7 चलने वाले न्यूज़ चैनल्स में ब्रेकिंग न्यूज़ की बाढ़ में आपका हर कसौटी पर इम्तिहान होता है.

खैर अभी आपको IIMC ENTRANCE EXAMS से पार पाना हैं. परीक्षा का वक्त करीब आता जा रहा हैं. हर बार की तरह इस बार भी IIMC में सीट पक्की करने के लिए होड़ लगने वाली हैं. रेडियो एंड टीवी पत्रकारिता विभाग काफी लोकप्रिय है. इसमें जगह पाने के लिए काफी कड़ा मुकाबला होता है.

RTV  में प्रवेश के लिए सबसे ज़रूरी है कि आपको खुद पर भरोसा हो. लोग आपको ये कहते मिल सकते हैं कि RTV में बहुत कम सीट हैं, इसमें नहीं होगा या फिर आप टीवी मीडिया में दिखने लायक नहीं हैं या फिर आपकी आवाज़ अच्छी नहीं है. खुद पर भरोसा रखिए. RTV  आप जैसे तमाम उन छात्र-छात्राओं के लिए हैं जिनके पास आत्मविश्वास हो, देश-दुनिया की जानकारी हो और जो खुद को ख़बरों से जोड़ने का जुनून रखते हैं.

IIMC  की लिखित परीक्षा पास करने के लिए ज़रूरी नहीं कि आप हर विषय के मास्टर हों. ज़रूरत है हर विषय में पर्याप्त जानकारी और उसे अपने अंदाज़ में उत्तर में लिखने की. प्रवेश परीक्षा में लिखने की कला बहुत ज़रूरी हैं. आपके शब्द ही परीक्षक के सामने आपकी पहचान बनेंगे.

मेरे हिसाब से RTV  की लिखित परीक्षा में इन बातों का ध्यान रखना चाहिए
1. अगर सवाल का जवाब 200 शब्दों में लिखने को कहा जाए तो आपका जवाब 200 शब्दों में ही समाप्त होना चाहिए. शब्द सीमा का विशेष ध्यान रखें.
2. किसी विषय अगर आपके पास ज़्यादा जानकारी नहीं हैं तो जो जानकारी है उसे ही लिखे. बेवजह इधर-उधर घुमाकर पेज ना भरें.
3. प्रश्न का उत्तर देते समय उसके मूल उद्देश्य से ना भटकें. तथ्यों को लिखें और स्पष्ट लिखें. आपको अनावश्यक बड़ा उत्तर लिखने के नंबर नहीं मिलने वाले.
4. RTV के मॉडल पेपर या फिर पिछले साल के पेपर सेट देखकर रोज़ाना लिखने की प्रैक्टिस करें. आपके पास जानकारी तो बहुत होती है लेकिन उसे शब्द सीमा और समय सीमा के अनुसार लिखने में मुश्किल होती है.
5. देश-विदेश के तमाम बड़ी घटनाओं के बारे में परीक्षा में पूछा ही जाता है. लेकिन कुछ सवाल जैसे हाल में पढ़ी किसी किताब की समीक्षा, हाल में देखी किसी फिल्म की समीक्षा, पसंदीदा अखबार-टीवी चैनल और पसंद की वजह अक्सर पूछे जाते हैं. इन पर लिखने का विशेष ध्यान रखें. समसामयिक घटनाओं के बारे में तो अखबार में पढ़ने का मौका मिल जाता है लेकिन इन मुद्दों पर आपको अपनी सोच के मुताबिक आलोचनात्मक टिप्पणी करनी होती है.

इसके बाद बारी आती हैं इंटरव्यू की. जैसा कि आपको पता हैं कि 85 अंक की लिखित परीक्षा और 15 अंक इंटरव्यू के लिए हैं. ये आपके लिए बहुत महत्वपूर्ण राउंड है. RTV का इंटरव्यू EJ, HJ, AD&PR से थोड़ा अलग होता है क्योंकि इसमें इंटरव्यू के दौरान ही पीस टू कैमरा (PTC) करने के लिए कहा जाता है. आप कैमरे के सामने कितने सहज हैं, आपमें कितना आत्मविश्वास है, इसकी जांच-परख हो जाती है. इंटरव्यू में मिलने वाले नंबर पर इसका बहुत फर्क पड़ता है.

आमतौर पर इंटरव्यू में भी समसामयिक सवाल ही पूछे जाते हैं या फिर आप इंटरव्यू को जिस ओर मोड़कर ले जाएं. इंटरव्यू लेने वाले कोई सवाल तय करके नहीं बैठते कि यही पूछना है. हो सकता है कि आपके घर-परिवार-पढ़ाई से शुरू होने वाले सवाल किसी ऐसी दिशा में मुड़ जाएं जो आपके कमांड एरिया में हों. और खतरा इस बात का भी है कि आपके जवाब से उपजे सवाल आपको वहां लेकर चले जाएं जिससे आप अनजान हों.

अगर आपको किसी सवाल का जवाब नहीं पता है तो सीधे-सीधे ये बता देना बेहतर होता है कि मुझे इस बारे में नहीं पता है. इससे सवाल पूछने वाले सवाल का विषय बदल देते हैं और उस समय आपको बड़ी राहत मिलती है कि एक जटिल विषय से मुक्ति मिली. इंटरव्यू में ऐसा बहुत लोगों के साथ होता है कि जब उन्हें एक बार लग जाता है कि वो गलत हैं तो फिर उनका आत्मविश्वास डगमगाने लगता है. इसे बनाए रखने के लिए सवाल पूछने वालों से ईमानदारी से बात करनी चाहिए. सबसे सही तरीका ये है कि जवाब आता है तो ठीक और नहीं आता है तो इंटरव्यू लेने वालों को खेद के साथ बता दें कि आपने इस बारे में नहीं पढ़ा है. ऐसे में आम तौर पर अगला सवाल ये रहता है कि आप ही बताइए कि आपने क्या पढ़ा है. तब आपको ऐसे विषय पर ही बात बढ़ानी चाहिए जिसे आप ठीक से जानते हों. अगर ये ऑप्शन मिलने के बाद आप इंटरव्यू करने वालों के सवालों का जवाब नहीं दे पाए तो फिर आपका पैक-अप तय है.

इंटरव्यू के दिन सुबह-सुबह अखबार पढ़ लें और समाचार चैनलों के एक नजर देख लें कि कहीं कोई बड़ी खबर तो नहीं चल रही. इंटरव्यू में जब आपसे पसंद के चैनल और अखबार पूछे जाते हैं तो जवाब में मिलने वाले अखबार या चैनल पर उस दिन की बड़ी खबरों का हिसाब भी ले लिया जाता है. बहुत संभव है कि उसी मुद्दे पर आपसे 30 से 40 सेकेंड कैमरे के सामने बोलने के लिए कहा जाए.

एक सवाल का तार्किक जवाब आपके पास ज़रूर होना चाहिए कि आप पत्रकार क्यों बनना चाहते हैं. मेरी सलाह ये रहेगी कि इस सवाल के जवाब में देश सेवा या समाज बदलने जैसे रूटीन जवाब ना दें अगर इस जवाब के लिए तर्क मांगने पर आप इधर-उधर झांकने लगें. बाकी आप खुद समझदार होंगे.

विवेकानंदजी का एक ब्रह्मवाक्य कहना चांहूगा Victory sure to come. परीक्षा की तैयारी कर रहे मित्रों को शुभकामनाएं. उम्मीद है कि आपसे IIMC कैंपस मुलाकात होगी.


बेस्ट ऑफ लक.
अमित कनौजिया
RTV JOURNALISM, 2005-05

Tuesday, April 17, 2012

बनावटी होने से बचें अपने उत्तरों में

2006-07 बैच में हिन्दी पत्रकारिता विभाग के टॉपर सौरभ द्विवेदी स्टार न्यूज, लाइव इंडिया और नवभारत टाइम्स के रास्ते दैनिक भास्कर के समाचार संपादक तक का सफर तय कर चुके हैं. चंडीगढ़ भास्कर में सिटी लाइफ की अगुवाई कर रहे सौरभ की फिल्म और राजनीति में गहरी दिलचस्पी है.
पंडित भीमसेन जोशी का एक भजन है. राग भैरवी में. बोल हैं- जो भजे हरि को सदा, सो ही परम पद पाएगा.

आप लोगों के लिए लिखते हुए यही सुन और गुन रहा हूं. क्यों, क्योंकि दुनिया का सबसे शानदार काम भी इस दर्शन को ही भजता है. बस यहां हरि की जगह उनके जन को भजने का काम करना होता है.

दूरदर्शन के दिनों में अकसर धार्मिक सीरियल देखने होते थे. गांव में होता तो अतिरिक्त श्रद्धा के साथ अगल-बगल वालों को देखता जो बस झुक ही जाते थे टीवी के सामने. मगर सीरियल की कथा में जब नारद आते तो दर्शक कभी कुढ़मुढ़ाते तो कभी हंसते. क्या था नारद का काम, इधर की उधर करना ताकि पुरोहित और पंडित (विशाल भारद्वाज की मकबूल) के शब्दों में कहें तों, संतुलन बने रहना जरूरी है. आग के लिए पानी का डर.

तो हम भी इधर की उधर करते हैं. बस नीयत और मकसद का फर्क बदल जाता है. जब हम पत्रकार बनते हैं तो दरअसल हम एक ऐसे जादूगर में तब्दील हो जाते हैं जिसे एक चेहरे पर कई चेहरे लगाने की वैधानिक छूट मिल जाती है. जब हम बम पीड़ित महिला की चीख के बीच उसके बेटे से बात करते हैं तो वात्सल्य और करुणा का रंग हमें भी कुछ जर्द कर देता है. जब हम किसी राजनेता से बात करते हैं तो एक लोभी (खबरों या किसी और चीज के...) और शातिर बिलौटे में तब्दील हो जाते हैं जो चौकन्ना है, हर कही गई और अनकही बात को जज्ब करने के लिए. जब हम भारत-पाक मैच के लिए स्टेडियम में होते हैं तो एक ऐसे सिरफिरे काफिर की तरह जो खुद को जन्नत में पाकर कह-कहे लगा रहा है.

बरकत वाला धंधा है ये. बस शऊर होना चाहिए इसमें जीने का. क्योंकि जी गए तो जीत गए. वो कहते हैं न कि सर सलामत तो सल्तनत हजार. पर ध्यान रखिए कि सर को सलामत आत्मसम्मान रखता है, थोड़ी सी ईमानदारी रखती है, कुछ सच्चाई भी. जीने और जीतने के लिए आपके सरवाइवल जीन का सेल्फिश होना जरूरी है. और इस जरूरत को आप आईआईएमसी में सीख सकते हैं.

आईआईएमसी एक कोख है, जहां आप नौ महीने अपनी संभावनाओं को इसकी नाल से जोड़ने आते हैं. ये गर्म है, सुरक्षित है, पोषण देने वाली है, बशर्ते आप ठीक ढंग से जुड़े हों. क्या करें इस जुड़ाव के लिए, एक भ्रूण बन इसमें घुस आने के लिए...

अंत के लिए आरंभ की ओर लौटते हैं. जो भजे जन को सदा. पत्रकार बनने की एकमात्र शर्त यही है कि आपको हर आदमी एक बांचती किताब सा दिखे. मैं अक्सर क्लास में भी यही बात दोहराता हूं कि अखबार लोगों के लिए निकलता है, उन्हें लोगों की बातें जाननी होती हैं और ये आप को तय करना है कि कैसे सुनाएंगे.

हर जिंदा आदमी एक डिक्शनरी होता है. उसके बोलने का ढंग, अंदाज आपकी मेमोरी बैंक में कुछ केबी घेर सकता है. उसकी तुर्शी और सोच आपको इस जन के बारे में जानकारी के स्तर पर कुछ समृद्ध कर सकती है. इसलिए लोगों से मिलें-जुलें, उन्हें उनकी मांद में जाकर तलाशें और फिर इस अनुभव का इस्तेमाल अपने उत्तरों में करें, अपनी समझ में करें.

क्या ये मुमकिन नहीं कि यूपी के चुनावों के विश्लेषण के दौरान भदोही के या छपरा के उस रिक्शे वाले का जिक्र हो जो आपको इस एग्जाम के लिए स्टेशन पहुंचाकर आया है. उसकी राय भी तो आपके उत्तर का हिस्सा बन सकती है. आपकी मां, टीचर, पड़ोसी की प्रतिक्रिया किसी भी समाज और राजनीतिशास्त्री जितनी मानीखेज हो सकती है.

इसलिए बेईमान और बनावटी होने से बचें अपने उत्तरों में. अपनी भाषा और जन के प्रति आंखें खोलकर रखें क्योंकि वही हैं, जो आपको उन ढाई घंटों के दरम्यान आने वाले ख्यालों में तर्क और लहजा मुहैया कराएंगे.

इधर चंडीगढ़ में पिछले कुछ दिनों से बारिश हो रही है. मेरे आईआईएमसी की मिट्टी भी गीली हो रही होगी उधर दिल्ली में. कुछ किसान हल का फल देख रहे हैं. बीज तैयार हैं क्या. आप तैयार हैं क्या...

वो साहिर कहते थे न...

हर नस्ल एक पौध है धरती की
जो पक जाने पर कटती है
कल और भी आएंगे
नगमों की खिलती कलियां चुनने वाले
हमसे बेहतर कहने वाले
तुमसे बेहतर सुनने वाले


...तो आओ इस दुनिया में तुम्हारा स्वागत है
सौरभ द्विवेदी

सौरभ का पिछला ब्लॉग- तो क्यों आना चाहते हो इस धंधे में

Monday, April 16, 2012

7 Point Programme for AD-PR

Manik Bhargava is 2005-06 batch passout of AD-PR Dept. SAIL selected him from IIMC campus and is currently posted as Assistant Manager in Delhi.
Hi all,

I guess you would be running short of time. I have a simple ‘7 Point Programme’ for you.  I worked for me, hope it does the same for you -

1.      Watch or see as many advertisements as possible. (Source: TV channels, http://www.afaqs.com/ )
2.      Try and read up on basic components of advertising like Target Audience, Message, Reach etc. (You can find it on any site that deals with Advertising, Google karo..)
3.      After you have done this try and go back to the advertisements and correlate with the ads or campaigns you went through in the first place. (You might want to use these examples)
4.      Next, try and understand why advertising is being done, to achieve what, how and when.
5.      For public relations look at all the big news in the past year or so, try and concentrate on news where there has been a dialogue between parties through media. (This is how PR works. You would get to know how people have tried to sell you an opinion media included. Use this to quote as examples or during Written or GD etc.)
6.      After you get a fair idea of all these, just go berserk and write the paper. (Note: Write crisp and to the point.)
7.      After selection come back and thank us.

These are the Seven Points to consider. Besides, these remember you do not need to know everything just have basic awareness. Try and correlate you knowledge of recent events with the happenings around you.

And one more just thing try to make an effort to put forth your views and make the examiner feel you are a thinking individual. Mugging up terms will not help if you do not understand what they stand for.

Hope all goes Well….


My wishes to all of You
Manik Bhargava
ADPR, 2005-06

Learn from the basic Insights of life

Harsh Verdhan, 2004-05 batch alumni of AD-PR department, started with Client Servicing with Leo Burnett and then moved to Interact Vision, Mudra Communications> The short span with these agencies made a solid ground for Corporate Table, Moved to IFFCO as PRO and now Heads PR for IFFCO.
Getting into IIMC is always a dream for all communicators. It somehow completes an essential criterion of you being a communicator but again you need to learn from yourself. It’s all about putting things into your plate but at the end of the day you had to eat of your own. There is no rocket science for getting into IIMC. It’s all about how you pen down your thoughts into a sheet at the time when you are sitting in examination hall. Mind you competition is very high but don’t know about the standards.

My experience says that it’s all about small things which you notice on daily basis. Reading more and more and basic understanding of what you read is more important. Read newspapers, magazines, learn examples, quote examples, try to extract WHY factor. Put an argument and give examples to support your argument, remember the examples have to be actual and not any supposition or you heard something, and quote the references.

It’s not that you had to write in very sophisticated language but yeah keep yourself simple and soft which can be easily understood by a layman also. Extract data and try to analyze it with suitable examples.  Try to be active on social media as the trend is shifting on web site now, you have to think more strategically, random thoughts can work only when you are writing for an advertisement but only that does not solve your purpose.

For ADPR you had to pick up small and common things, try to interact with people, share your ideas, and refer to sites like afaqs.com, exchange4media.com for hard core subject related update. Watch news shows, infotainment programs and the so called family oriented daily soaps. Every show gives you a hidden insight; every TV commercial has a hidden and clear agenda. Try to ask WHY and answer them yourself, pen down things and rework them. Somehow, the 6months old hot topics are the key players. Be a good and patient listener and keep your mind cool and calm. Keep in mind that what is the message, who is the mass & what is the medium.

There is nothing like instant coffee, take a step by step approach and be at the top. The life at IIMC is fun and learn out of fun. And yes, the last is Never Give-up.


Harsh Verdhan
Head-PR, IFFCO

Wednesday, April 11, 2012

हर सवाल जरूरी हैः 85 की लिखित, 15 का साक्षात्कार

अविनाश कुमार चंचल हिन्दी पत्रकारिता 2011-12 बैच के छात्र हैं और कैंपस से ही हिन्दुस्तान, पटना में करियर की शुरुआत का टिकट पा चुके हैं. इस शानदार लेख के लिए आभार के साथ उनकी सफल पारी की शुभकामनाएं.
आईआईएमसी में दो तरह के बच्चे आते हैं. एक जिनके भीतर जर्नलिज्म का भूत टाइप कुछ सवार होता है और दूसरा जो बस ऐसे ही एक ऑप्शन की तलाश में आ जाते हैं. लेकिन एंट्रेंस को पास करने के लिए दोनों टाइप के बच्चों में एक गुण खास होती है, वो है- खबरों से प्यार. अखबार से प्यार. इसलिए जरूरी है कि आप खबरों से प्यार करें.

आईआईएमसी देश की बेहतरीन संस्थानों में से एक है. शायद इसलिए कई बार ये एक हौव्वा की तरह लगता है. सच पूछिए तो आज से एक साल पहले तक अविनाश कुमार चंचल के लिए भी आईआईएमसी एक हौव्वा ही था. लेकिन यकीन मानिए आईआईएमसी कोई हौव्वा नहीं है, यदि आपके पास एक रणनीति है.

सबसे पहले तो आप हर रोज दो अखबारों का अध्ययन जरूर करें और आज कल वेब ने ये सुविधा हमें मुहैया करा दी है कि हम एक दिन में एक ही मुद्दे पर पांच-सात अखबारों को पढ़ सकते हैं. इंटरनेट पर कम-से-कम दो-चार संपादकीय पढ़ लें तो और बेहतर.

फिर ये सवाल भी महत्वपूर्ण है कि अखबार के सभी खबरों को चाटा जाये या फिर सेलेक्टिव होकर पढ़ा जाये. जवाब है बिल्कुल सेलेक्टिव होकर पढ़ा जाये. हमारे लिए सिटी की रूटीन खबरों का महत्व नहीं है. मुख्य रूप से देश-विदेश, आर्थिक, खेल से जुड़ी खबरों को ध्यान से पढ़ना चाहिए. उसमें भी उस खबर को जो लगातार चर्चा में रहे हैं.

फिलहाल देश में जो मुख्य मुद्दे हैं- एफडीआई इन रिटेल, सेना प्रमुख बनाम सरकार, कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र, पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव और केंद्र पर असर, एनसीटीसी, मुल्लापेरियार बांध, नदी जोड़ो परियोजना, सिटिजन चार्टर, नक्सलवाद, रेल बजट, आम बजट 2012, मानव विकास रिपोर्ट 2011, गरीबी रेखा विवाद, ब्रिक्स सम्मेलन, शिक्षा का अधिकार, राइट टू रिकॉल, सोशल साइट्स पर अंकुश, जीएसटी, तेलंगाना, मणिपुर में आर्थिक नाकेबंदी, अफ्सपा, हक्कानी नेटवर्क, मेमोगेट, सीरिया विवाद, गद्दाफी का पतन और लीबिया में लोकतंत्र, ऑक्यूपाई वॉल स्ट्रीट. इन मुद्दों के साथ-साथ कुछ सवाल जैसे किताब की समीक्षा, फिल्म की समीक्षा, पसंदीदा अखबार, टीवी चैनल आदि भी महत्वपूर्ण हैं.

सवाल इस तरह से पूछे जाते रहे हैं कि सोशल साइट्स पर अंकुश की कोशिशों को आप कैसे देखते हैं. या आपने हाल में कौन सी फिल्म देखी है और आपको वो कैसी लगी, तर्क के साथ. आप कौन सा अखबार पढ़ते हैं और वो दूसरों से कैसे अलग है. आप जिस समाचार चैनल को देखते हैं उसे पसंद करने का आपका पैमाना क्या है. शिक्षा का अधिकार को लेकर देश में क्या चल रहा है और आपका इस पर क्या नजरिया है. परीक्षा में पूछे जाने वाले सवालों के जरिए यह जानने की कोशिश रहती है कि एक समकालीन मुद्दे में परीक्षार्थी कितनी रुचि रखता है, उसके तमाम पहलुओं को कितना समझता है और अगर मुद्दा विवादित है तो जाहिर तौर पर परीक्षार्थी का उस मुद्दे पर क्या नजरिया है.

अखबार के साथ-साथ जनवरी से मई तक का प्रतियोगिता दर्पण, प्रतियोगिता साहित्य जैसी पत्रिकाएं देख लेंगे तो चर्चित व्यक्ति और लघु उत्तरीय सवाल हल करने में सहूलियत होगी.

लिखने की शैली की बात करें तो इसके लिए जरूरी है कि खूब पढ़ा जाय और पढ़े को लिखने का अभ्यास किया जाय. तहलका जैसी पत्रिकाओं को पढ़ने से लेखन-शैली सुधारने में काफी मदद मिलती है. बेहतर होगा कि ऐसी पत्रिकाओं का नियमित पाठक बन जाएं. साथ ही, पढ़ने का कुछ प्रेम इंडिया टुडे, आउटलुक पर भी लुटा पाएं तो बेहतर होगा.

हिन्दी पत्रकारिता में एक सवाल जो पूछा जाता रहा है वो है एक पाराग्राफ का अनुवाद. इस सवाल का जवाब देख रहे परीक्षक शब्द-दर-शब्द तकनीकी अनुवाद की बजाय ऐसे अनुवाद को पसंद करते हैं जो अंग्रेजी में कही गई बात को हिन्दी की भाव-भंगिमा के साथ पेश करे. आपके पास समय कम होगा इसलिए आप मक्खी पर मक्खी न बिठा कर अंग्रेजी के तथ्य और कथ्य के भावों को अपनी भाषा में लिख दें. शब्दानुवाद करने से बचें.

परीक्षा हॉल में टाइम मैनेजमेंट बहुत जरूरी है इसलिए बेहतर होगा कि आप निर्धारित शब्दों में ही सारी बात करें और कोशिश करें कि एक भी सवाल छूट न पाये. आपको पता होना चाहिए कि आईआईएमसी का टेस्ट 100 नंबर का होता है जो 85 नंबर की लिखित परीक्षा और 15 नंबर के साक्षात्कार में बंटे हुए हैं. इसलिए लिखित परीक्षा में बेहतरीन प्रदर्शन ही साक्षात्कार को भी पार करने की गारंटी कर सकता है.

इसे आप ऐसे समझ लें तो बेहतर होगा कि साक्षात्कार के लिए बुलाए गए तकरीबन 150-60 बच्चों (एक सीट के लिए अमूमन तीन बच्चे बुलाए जाते हैं) के लिखित परीक्षा के अंक में बहुत बड़ा अंतर नहीं होता है. मसलन साक्षात्कार के लिए बुलाए गए सबसे बढ़िय लिखने वाले बच्चे ने 65 नंबर पाए हों तो 64 नंबर पर 4 बच्चे होंगे, 63 नंबर पर 15 बच्चे मिलेंगे. बमुश्किल 5-8 नंबर के फासले वाले बच्चे साक्षात्कार में पहुंचते हैं. इसलिए 15 नंबर की सीमा वाले साक्षात्कार में मिलने वाला नंबर अगर इस 5-8 नंबर की खाई को न पाट पाए या लिखित परीक्षा में मिली बढ़त को कायम न रख पाए तो आप दाखिले से चूक सकते हैं. इसलिए लिखित परीक्षा और साक्षात्कार दोनों में अपना सर्वश्रेष्ठ दें.

साक्षात्कार का एक ही फंडा है. आप ज्यादा से ज्यादा खुद को अभिव्यक्त करें लेकिन संतुलन के साथ. साक्षात्कार के सवाल आपके नाम, आपकी पढ़ाई, आपकी रुचि, आपके परिवार, आपके शहर-गांव की बातों से शुरू होते हैं और देश-दुनिया की उन बातों तक जाते हैं जो आपकी रुचि और आपकी बातों से निकलते हैं. बात से ही बात निकलती है, आईआईएमसी के इंटरव्यू में सच लगेगा. इंटरव्यू ले रहे लोग यह जरूर जानना चाहते हैं कि आप पत्रकारिता में क्यों आना चाहते हैं.

चीजों के प्रति आलोचनात्मक दृष्टिकोण ही आपको आईआईएमसी पहुंचायेगी और कल को संपादक पद तक भी.


शुभकामनाओं के साथ
अविनाश कुमार चंचल
हिन्दी पत्रकारिता, 2011-12

Tuesday, April 10, 2012

Focus on events happened in last six months

Prashanth Kumar Chiguru, currently working for The Asahi Shimbun in South Asia Bureau as Correspondent. Before that I Interned with The Hindu in New Delhi Bureau.

All the best for the aspirants who are appearing for IIMC entrance examination. I have appeared for the test in 2009 for English Journalism.It is simply test unlike other competitive exams, No need to be terrified much or get frightened with test and the Interview. 

For English Journalism, candidates need to be updated on Current affairs particularly events happened in last six months. I only recommend to read only The Hindu newspaper, as it provides Information very precise and comprehensive.

Apart from that try to practice writing by observing the news articles especially the Intro Part. Don’t be verbose, avoid writing long sentences and presentation should be in simple and fair language.

In essay section, this time I expect questions related to Koodankulam Nuclear Plant and Anti-Nuclear struggle, Indo-Pak relations (Post Osama Death and recent Hafiz saeed Controversy), BRICS summit, Persecution of Tamils in Srilanka and UNHRC Geneva resolution, Emergence of Social Media and Internet Censorship by Indian Government, Importance and Relevance of Social Media (Facebook, Twitter, Blogs etc) in related to Social Revolution’s and Mass Movements (Arab Spring and Team Anna Movement), 2G scam and its impact on UPA-II, Recent Assembly election in Five Indian states and the key role of regional parties in upcoming Presidential elections.

To refresh your minds, I suggest the aspirant to go through Competition Success Review Magazine( last six months issues).

For any other queries and suggestion please shoot me a mail at prashanthnadar@gmail.com

Prashanth
English Journalism, 2009-10
IIMC New Delhi.

Sunday, April 8, 2012

You are not going for a beauty contest


Mona Parthsarathi, 3rd ranked in 1998-99 batch of Hindi Journalism, currently working as a senior sports journalist with Press Trust of India.

Hi friends,

All the best for IIMC entrance test. No need to be panic at all, as you don't have to learn "rocket science" to pass this test. I hope all of you have been reading at least 2-3 prominent dailies regularly including The Hindu. Plus go through some quality current affairs magazines.

Dont opt "rattafication" as you have to have news sense to be a good journalist and ratta yaha kaam nahi karta. Written test is comparatively easier. The main task is interview & GD.

Being a sports journalist I can suggest you to go through the details of CWG scam, India's world cup win in 2011, Australia tour, Olympic preparations, Sports bill plus of course 100th international century of Sachin Tendulkar.

I belong to Indore and went for interview straight from the railway station. So all the talks about be presentable and emphasis on looks are rubbish. You are not going for a beauty contest. The interviewers will check your confidence level and knowledge of current affairs plus your perspective on relevant issues.

Keep in mind that your interview starts the moment you enter the room. Be confident, don't over express yourself and be focused.


All the very best
Mona Parthsarathi

The secret to crack the IIMC code

An alumnus of the 2001-02 batch, Rakesh Kumar Das is currently engaged as an Assistant Editor with the Seven Sisters Post based at Guwahati, Assam. Earlier, Rakesh was associated with the Hindustan Times and have worked at places like Patna and Kolkata before moving to Guwahati.
Preparing for any entrance test is not easy and when it comes to IIMC, the issue is more serious.

The secret to crack the IIMC code is simple but needs honesty and commitment from the candidate. Students tend to complain that they don't get time to read the newspapers in the morning and depend mostly on the electronic media for news and views. Even I believe that electronic media is fast but newspapers give us more facts and details. But then, let us not forget that every medium has its own value and importance.

Reading newspapers on a daily helps one gather knowledge and keep one self abreast with current affairs. The most important advice that I want to give to those students who want to study at IIMC is, always keep your ideas simple, crisp and maintain a positive attitude.

In the media world, especially newspapers, simplicity is what matters most. The more simple you write the more people would like to read your story.

After all, which reporter doesn't want his stories to be read by one and all and evoke response from the readers. So, relax, read the newspapers daily and crack the IIMC code.


Best of luck

Expert Tips from Prof. M.R.Dua

  • Read Times of India/ Indian Express/ Financial Express/ Mint as thoroughly as possible.

 

  • Read editorials of Times of India/ Hindustan Times/ Indian Express for the last one month, at least.

 

  • Also go through main edit page articles of these papers too.

 

  • Watch Times Now, CNN-IBN, NDTV, News X & Headlines Today debates only, generally after 8 PM daily.

 

  • Read Time, Outlook, India Today magazine since January 2012.

 

  • Expect questions on recent states elections of 5 states, upcoming presidential poll of United States of America, recent developments in West Asia.

 

 

Wish you all the best

Prof. M.R. Dua

Ex. Professor, IIMC