Click here for Myspace Layouts
Showing posts with label हिंदी पत्रकारिता विभाग. Show all posts
Showing posts with label हिंदी पत्रकारिता विभाग. Show all posts

Tuesday, July 1, 2014

सरल और स्पष्ट रहें, जवाब में जलेबी न बनावें

अभिषेक कुमार चंचल हिन्दी पत्रकारिता विभाग के 2013-14 बैच से हैं. कैंपस में सिने मंच के माध्यम से खूब रंग जमाया. सामाजिक कार्यो में रुचि रखते हैं. जेएनयू में काम करने वाले मजदूरों के बच्चों को पढ़ाने का काम किया. इसी रुझान ने मीडिया हाउस की जगह सामाजिक संगठन में पहुंचाया. गांधी फेलोशिप के लिए चयन लेकिन इरादा पर्यावरण के मुद्दे पर काम करना. फिलहाल ग्रीनपीस के लिए गांव भ्रमण में हैं. अखबारों के लिए स्वतंत्र लेखन भी.


देश में पत्रकारिता के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान भारतीय जनसंचार संस्थान में दाखिले के अंतिम राउंड की शुरुआत में दो दिन ही शेष हैं. मीडिया में कॅरियर बनाने के इच्छुक छात्र इस अवसर को गंवाना नहीं चाहते. कुछ की तैयारी हो चुकी होगी लेकिन कुछ अब भी कन्फ्यूज होंगे. हम भी ऐसे ही थे. घबराना नहीं है.

आपका ज्यादा समय न लेते हुए सीधी बात. बचे हुए दिनों में कैसे करें तैयारी. आईआईएमसी के किसी भी कोर्स के साक्षात्कार की तैयारी के लिए जरुरी है कि आसपास हो रहे घटनाक्रम की जानकारी रखें. देश- दुनिया की जानकारी तो रखिए ही, आप जिस क्षेत्र से आते हैं, वहां की राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक व सांस्कृतिक हलचलों के बारे में भी अपनी जानकारी मजबूत कर लें. घटनाओं और बदलाव पर नजर हो. अवलोकन करने की क्षमता होनी चाहिए.

आप अपनी रुचि के विषय पर पकड़ मजबूत बना लें. साक्षात्कार में साक्षात्कार बोर्ड के सदस्यों को अपने विषय की तरफ ले जाने की कोशिश करें. किसी भी प्रश्न का जवाब आत्मविश्वास से दें. जिसका जवाब नहीं आता, सीधे मना कर दें.

जवाब सरल और स्पष्ट देने का प्रयास करें. जलेबी न बनावें. किसी भी जानकारी को समझदारी के साथ बेहतर ढंग से व्यक्त करें. अगर आप किसी भी मसले पर स्पष्ट विचार रखते हैं तो साक्षात्कार में सफलता हासिल कर सकते हैं.

इसके साथ ही इन सवालों के लिए तयशुदा तैयारी रखें- आप पत्रकारिता क्यों करना चाहतें हैं? अपने बारे में पांच अच्छी और पांच बुरी बात बताऐं? आपकी रुचि क्या-क्या है?


हार्दिक शुभकामनाएँ!

Monday, June 30, 2014

इंटरव्यू में ज्ञान देने का रिस्क न लें

बिक्रम कुमार सिंह हिन्दी पत्रकारिता विभाग 2013-14 बैच के छात्र हैं. कैंपस प्लेसमेंट से समाचार चैनल न्यूज एक्सप्रेस में.

बिक्रम कुमार सिंह हिन्दी पत्रकारिता विभाग 2013-14 बैच के छात्र हैं. कैंपस प्लेसमेंट के रास्ते इस समय समाचार चैनल न्यूज एक्सप्रेस के साथ.

लिखित परीक्षा में सफल साथियों को मेरी तरफ से शुभकामनाएं. दिल में लगन हो और खुद पर विश्वास हो तो आईआईएमसी में प्रवेश आसान है. मैं जानता हूं कि आईआईएमसी में प्रवेश के लिए कितनी मेहनत करनी पड़ती है, कितना धैर्य रखना पड़ता है.

अब बस एक कदम दूर हैं आप अपनी मंजिल से. जिनका इस वर्ष नहीं हो पाया है या जो इंटरव्यू में सफल नहीं हो पाते हैं वो हताश न हों क्योंकि अगर आपको अपने ऊपर विश्वास है तो आप बगैर आईआईएमसी आए भी सफल पत्रकार बन सकते हैं. इंटरव्यू में सफलता के लिए आपको तीन चीजों पर ध्यान देना होगा.

- आपका आत्मविश्वास
- आपका अध्ययन एवं ज्ञान
- आपकी अभिव्यक्ति

सब कुछ सही है. आपके पास हर तरह का ज्ञान है. आपके पास अनुभव भी है लेकिन इन चीजों का फायदा तभी मिलेगा जब आप इंटरव्यू के दौरान खुद को अच्छे से अभिव्यक्त कर पाएं अन्यथा.

कुछ कड़वी सच बताता हूं. शायद आपको अच्छा न भी लगे. अगर आप टीवी के सफल पत्रकारों को देखकर या एंकर बनने या फिर प्लेसमेंट के लिए आईआईएमसी में प्रवेश पाना चाहते हैं तो ये आपका भ्रम है. इससे बेहतर आप दूसरों को मौका दे दें. ये सब मेहनत और परिश्रम से आगे जाकर मिलेगा. आईआईएमसी में आपको खुद को निखारने का एक प्लेटफॉर्म मिलता है. इंटरव्यू देते समय इन चीजों का ध्यान रखें.

- आप जिस जगह से आते हैं, उसके बारे में अवश्य जान लें. वहां के सामाजिक, राजनीतिक, ऐतिहासिक और दूसरी रोचक चीजों के बारे में आपसे पूछा जा सकता है.
- आपसे आपके बारे में पूछा जा सकता है. आपके बारे में जानने के बाद आपसे ही संबंधित कुछ और प्रश्न किए जा सकते हैं.
- जो भी बोलें, स्पष्ट बोलें, सच बोलें और सरल बोलें.
- आप वहां ज्ञान देने का रिस्क न लें. इंटरव्यू ले रहे लोग आपसे ज्यादा ज्ञानी हैं.
- पत्रकारिता क्यों करना चाहते हैं, ये सबसे कॉमन सवाल है. अपनी समझ बनाकर जाएं.
- किसी सवाल का जवाब तभी दें जब आपको अच्छे से आता हो. इंटरव्यू के दौरान हां में हां न मिलाएं. वो कई बार आपके आत्मविश्वास को चेक करने के लिए गलत बातें भी बोल सकते हैं.
- आपकी समझ, आपकी सोच और आपका व्यवहारिक ज्ञान ही आपका एंट्री कार्ड है. बाकी सारे ट्रंप कार्ड फेल हो जाते हैं.
- जिस प्रश्न का जवाब आपके पास न हो उसके लिए आप शालीनता के साथ मना कर दें. ये पॉजिटिव चीज है. इसके लिए नेगेटिव मार्किंग नहीं होगी.
- KISS (KEEP IT SIMPLE AND SORT) फॉर्मूला को अपनाएं. यही आपकी सफलता की कुंजी है.
- लिखित परीक्षा से आपको चुना गया है इसलिए खुद को किसी से कम न समझें.

सुनियोजित तरीके से तैयारी करिए और अपने ऊपर भरोसा रखिए. फिर आईआईएमसी क्या सारे दरवाजे आपके लिए खुले होंगे.

शुभकामनाएं.

Sunday, June 29, 2014

खूब पढ़िए और ईमानदार रहिए

विनम्रता चतुर्वेदी हिन्दी पत्रकारिता विभाग के 2012-13 बैच से हैं. सीएनबीसी आ‌वाज में इंटर्नशिप के बाद एनबीटी, लखनऊ की लॉन्चिंग टीम का हिस्सा बनीं. फिलहाल एनबीटी, दिल्ली में कॉपी एडिटर.

सबसे पहले लिखित परीक्षा क्वॉलिफाई करने के लिए बधाई. आप देश के सबसे अच्छे शिक्षण संस्थानों में से एक का हिस्सा बनने से बस चंद कदम दूर हैं. ये छोटी सी दूरी बस थोड़ी सी समझदारी से पूरी की जा सकती है. यूं तो किसी भी इंटरव्यू का कोई सेट फॉर्मेट नहीं होता, लेकिन सभी एक-दूसरे से कुछ अलग और कुछ समान होते है.

सबसे पहले बात सामान्य सवालों की जो पूछी ही जाएंगी. हम अक्सर अपने नाम, घर-परिवार और इलाके के बारे में जानते तो बहुत कुछ हैं, लेकिन इस पर इंटरव्यू के लायक तैयारी नहीं करके जाते. ध्यान रखिए, ये सवाल ही एंट्रेंस गेट हैं. अगर इनका जवाब देने में हिचकिचाहट हुई तो आगे के सवालों में कॉन्फिडेंस डोल जाएगा. मसलन, अगर आप उत्तराखंड के किसी गांव के रहने वाले हैं तो आपको वहां की खेती-बाड़ी, जलवायु वगैरह के बारे में भी पता होना चाहिए. इन सवालों का जवाब चाव से दें. हो सकता है आगे के सवाल भी यहीं से उठें. घर के सदस्यों के बारे में भी पूछा जा सकता है. कम से कम शब्दों में अपने पारिवारिक बैकग्राउंड को बताएं.

अब बारी हैं उन सवालों की जिनके लिए आईआईएमसी मशहूर है. सबसे बड़ा प्रश्न, पत्रकारिता क्यों करना चाहते हैं? किसी किताब में इसका जवाब नहीं मिलेगा. आप वही बताइए जो आप महसूस करते हैं. आपकी सोच यथार्थ के करीब होनी चाहिए. ये तो कतई मत कहिएगा कि मैं क्रांतिकारी टाइप कुछ करना चाहता हूं. दुनिया बदलना चाहता हूं. वगैरह वगैरह. इस सवाल के लिए जटिल जवाब देने के बदले छोटा सा प्रभावशाली जवाब दीजिए.

इसके बाद एक संभावित सवाल हो सकता है कि पत्रकारिता में किस फील्ड में जाना चाहते हो? यानी पहले तो ये कि डेस्क पर या फील्ड में. अगर फील्ड में तो किस बीट या क्षेत्र में दिलचस्पी है. हो सकता है आप में से कुछ के पास इसका जवाब न हो, लेकिन अगर है तो इंटरव्यू में बताना न भूलें. अगर डेस्क देखना है तो बिजनेस, स्पोर्टस, एंटरटेनमेंट या जेनरल न्यूज.

हर क्षेत्र में दिलचस्पी है कहने का एक मतलब ये भी निकाला जा सकता है कि किसी में भी दिलचस्पी नहीं है. ये महज शौक है. जमाना स्पेशलाइजेशन का है, इसलिए अपनी पसंदीदा बीट बता दें. अगर स्पोर्ट्स अच्छा लगता है तो बता दें कि भविष्य में स्पोर्ट्स रिपोर्टर बनना चाहते हैं. इससे फायदा ये होगा कि इंटरव्यूअर को आप अपने पाले में ले आएंगे. फिर वो आपसे स्पोर्ट्स के सवाल बरसा देंगे. ध्यान रहे, पसंदीदा फील्ड बताने के बाद आप पीछे नहीं हट सकते इसलिए पसंद जाहिर करने से पहले खुद को नाप-तौल लें. पूरी गहराई से पढ़ कर जाएं. पढ़ने का कोई विकल्प नहीं है.

पूरा का पूरा इंटरव्यू आपकी जागरूकता और जिज्ञासा खंगालेगा. देश-दुनिया, राजनीति, इकोनॉमी, खेल और लोकल खबरों को ध्यान से पढ़ें और घटना-घटनाक्रम याद रखें. ग्रैजुएशन मास कॉम में है तो जर्नलिज्म के बेसिक सवाल भी पूछे जा सकते हैं. किसी अन्य सब्जेक्ट से ग्रैजुएट हैं तो उसकी भी जानकारी होनी चाहिए. हॉबी से जुड़े सवालों के जवाब संक्षिप्त रखें.

इन सबके ऊपर. पूरे इंटरव्यू में सही मात्रा में कॉन्फिडेंस बनाए रखें. आपकी विचारधारा कोई भी हो उसे लॉजिकली जस्टिफाई करें. जवाब ईमानदार होने चाहिए. साक्षात्कारकर्ता को सवाल पूरा करने दें. पहले जवाब दिया तो दिग्गजों को हर्ट होगा ना दोस्त. कोई जवाब नहीं आए तो सॉरी बोलने में देरी न करें. चिल रहिए, बढ़िया सीवी बनाइएं, पूरे इंटरव्यू में कोशिश करिए कि सवाल आपकी दिलचस्पी से जुड़े हों. इंटरव्यूअर को बार-बार अपने पाले में लाइए. वेल ड्रेस होकर इंट्री और बढ़िया स्माइल के साथ थैंक्यू बोलकर एग्जिट. बस फिर क्या है. आईआईएमसी आपको वेलकम करेगा.

शुभकामनाएं.

Saturday, June 28, 2014

पूछा वही जाएगा जो आप चाहते हैं

अनुग्रह मिश्रा 2012-13 बैच में हिन्दी पत्रकारिता विभाग के छात्र रहे हैं. फिलहाल राज्यसभा टीवी में कार्यरत हैं. आप इनसे टीवी की चर्चाओं में बतौर दर्शक शामिल होने के लिए भी संपर्क कर सकते हैं.

सबसे पहले आप लोगों को ढेर सारी बधाई दूंगा. सब दे रहे हैं इसलिए नहीं बल्कि इसलिए क्योंकि आप इसके ह़कदार हैं. खुशी होती है जब आप देश के सबसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान की प्रवेश परीक्षा को पास कर लेते हैं. उस खुशी को बरक़रार रखने की ज़रूरत है और थोड़ा धैर्य रखने की भी क्योंकि आने वाला वक़्त आपका है.

आप लिखित परीक्षा पास कर चुके हैं इससे ज़ाहिर है कि आप कुछ अलग सोच रखते हैं. अब बारी है कि आप ख़ुद को कैसे पेश करते हैं. थोड़ा सा डर ज़रूर लग सकता है लेकिन याद रखना डर के आगे जीत है. इंटरव्यू से घबराने की ज़रूरत क़तई नहीं हैं लेकिन उसे हल्के में लेना भी बेवकूफी होगी.

ध्यान रहे आप से वही पूछा जाने वाला है जो आप चाहते हैं लेकिन आप उसका जवाब कितनी साफगोई से दे पाते हैं ये ज्यादा मायने रखता है. बायोडाटा में जो चिपका रखा है उसे फिर से रिमाइंड कर लें क्योंकि सवाल आपके उस बायोडाटा और आपकी रुचि के अनुसार ही दागे जाने हैं.

सवालों का जवाब देते हड़बड़ी न दिखाएं नहीं तो अपनी बात से भटक कर जवाब आते हुए भी नहीं दे पाएंगे. बाकी आपके जवाबों से ही काउंटर प्रश्न पूछे जा सकते हैं, उसके लिए भी तैयार रहें.

आप कहां से हैं और वो जगह किस बात के लिए जानी जाती है इसका जवाब आपको न हम दे पाएंगे और न ही गूगल बाबा. आप को ये मालूम होना चाहिए. वहां की राजनीति, वहां की समस्याओं से आपका रूबरू होना ज़रूरी है. आप का एजुकेशन बैकग्राउंड अगर साइंस या कॉमर्स है तो चेंज ऑफ ट्रैक के सवाल भी हो सकते हैं. फील्ड ऑफ इन्ट्रेस्ट पर भी ज्ञान देने के लिए तैयार होकर जाएं.

देश-दुनिया में जो हो रहा है उसकी जानकारी होनी चाहिए. आप इराक़ और भारत-चीन रिश्तों के विशेषज्ञ भले ही न हों लेकिन आपको ये पता होना चाहिए कि भारत के उप-राष्ट्रपति फिलहाल किस देश के दौरे पर हैं.

क्योंकि आपका रुझान खेल की खबरों में है इसलिए आपको बाज़ार में रुपए की उछाल के बारे में नहीं पता है ये तर्क मुश्किल पैदा कर सकता है. कम से कम तमाम बड़े विषयों पर आपके पास एक सामान्य जानकारी ज़रूरी है भले आप किसी भी मुद्दे पर विषेशज्ञ न हों. 
सवालों में आपकी विचारधारा, राजनीतिक रुचि के बारे में सीधे तौर पर नहीं पूछा जाएगा लेकिन आपके जवाब में वो झलक सकती है फिर भी उसकी चिंता न करें. किसी की अंधभक्ति से बचें और किसी मसले के तमाम पहलुओं पर ग़ौर करने के बाद ही उसकी विवेचना करें.

बाकी पत्रकारिता क्रांति लाने के लिए करना चाहते हैं, देश बदलने के लिए करना चाहते हैं- जैसे जवाब देने से बचना चाहिए. सामने बैठे लोग ऐसे जवाब पर आपको घेर सकते हैं. मीडिया के मालिकों और पूंजी के हित तक बात जा सकती है. इसके बदले आप लेखन और समसामयिक विषयों में रुचि जैसी बातों का सहारा ले सकते हैं और मानते हैं कि इसे पेशेवर तौर पर अपनाना आपके लिए बेहतर करियर विकल्प है.

तो अब आप चलें इंटरव्यू के लिए और हां थोड़ा सा ठीक से पहन-वहन के जाएं. इंटरव्यू हॉल में आपकी ही तरह अपनी बारी का इंतजार कर रहे साथियों से हाय-हलो करके खुद को सहज रखना अच्छा रहेगा.


ढेर सारी बधाई पार्ट-2 :)

Friday, June 27, 2014

पढ़कर जाओगे तो इंटरव्यू में भौकाल सेट रहेगा

विकास त्रिवेदी | हिंदी पत्रकारिता विभाग में 2012-13 बैच में आए थे. इस समय इतना ही काफी है. बाकी नाम बनाने के लिए विकास कार्य प्रगति पर है.

शाबास. मुबारक हो. तुम अच्छा लिख लेते हो यार. अच्छा ना लिखा होता तो ये पढ़ ना रहे होते. इंटरव्यू कब है. कभी भी हो अब काहे का डर. आईआईएमसी में 75 फीसदी तो घुस ही गए हो. बस अब खाली तीन-चार दिग्गजों को अपनी प्रतिभा से चमकाना बाकी है.

अच्छा एक बात बताइए, डर लग रहा है क्या. अगर हां तो अच्छी बात है. इंटरव्यू से पहले डरना जरूरी है. डरने से कामचोरी नहीं आती और दिमाग दौड़ता रहता है. इंटरव्यू भेदने के लिए दिमाग का दौड़ना बेहद जरूरी है. बस इस डर को सिर्फ तैयारी करने तक ही रखिएगा. जिस दिन इंटरव्यू देने जा रहे हों उस दिन डर को शीशे में शक्ल देखने के साथ ही घर छोड़कर आइएगा.

आईआईएमसी में भी इंटरव्यू इंसान ही लेते हैं बस इसे ध्यान में रखिएगा. अब बात कि काका अंदर बोलेंगे क्या ? हां तो उसके लिए भी ज्यादा लोड लेने की जरूरत नहीं है. 4-5 महीने से तो अखबार कुछ ज्यादा ही चाट रहे होंगे. देश-दुनिया की बड़ी घटनाएं आपको पता ही होंगी. नहीं हैं तो पता कीजिए.

सबसे महत्वपूर्ण आपकी सीवी है. उसमे अब तक जो उपलब्धियां और कर्म दर्ज हैं, मसलन कहां के हैं, किन विषयों में क्या पढ़ाई की है. किस-किस को पढ़ा है और क्या-क्या पढ़ा है. जिस अखबार को ज्यादा पढ़ते हैं उसका एडिटर कौन है. लोकसभा चुनाव, इराक, अमेरिका, मोदी, केजरीवाल, कांग्रेस, तेलंगाना, कश्मीर, भारत-पाक, ISIS, यूक्रेन, मनमोहन सिंह, नए मंत्री, बिहार, गुजरात विकास, अवार्डस, मोहसिन शेख, सोशल मीडिया, रेप और यूपी. इन सभी को 10 के पहाड़े की तरह माथे में उतारकर इंटरव्यू वाले कमरे में प्रवेश करिएगा तो ज्यादा मगजमारी नहीं करनी पड़ेगी. इंटरव्यू वाले दिन के अखबार की लीड, एंकर, संपादकीय पढ़ेंगे तो अच्छा रहेगा.

अगर इंटरव्यू में इससे बचने का कोई मारक उपाय आपके दिमाग में आया हो तो ट्राई न करें. बोर्ड में लोग एवैई नहीं बैठे हैं. इसके अलावा अपनी कुंडली के सारे ग्रह पता होने चाहिए. जैसे किस इलाके के हो, सांसद, विधायक, नेता, अभिनेता, खिलाड़ी, साहित्यकार, कोई अवार्ड विजेता अगर उधर से है तो कौन है, सब ज्ञान हो तो इंटरव्यू में भौकाल सेट करने में आसानी रहेगी. हाल फिलहाल में देखी गई फिल्म की पूरी राम कथा जान लीजिएगा. मूड मस्त रखिएगा. एकदम बिंदास.

अब बात जरा लुक-शुक की. मिथुन लुक में जाने का कष्ट न करें वरना कैंडी क्रश की तरह किसी से लाइफ मांगनी पड़ेगी. शरीफ से बनकर जाइएगा. लगे कि पत्रकार जैसा कुछ बनना चाहते हैं. वैसे ध्यान रहे कि ज्ञान आपको उस लाल दरवाजे में इंट्री दिलवाएगा ना कि फॉर्मल कपड़े और चमड़े वाले काले जूते.

दबाकर घूरते हुए, आंखों में आंखें डालकर जवाब दीजिएगा (ऐसा ना लगे कि दुश्मन को देख रहे हैं). एक बात और यार, प्लीज़ झूठ मत बोलना. हमेशा अपनी कमी हंसते हुए स्वीकार करनी चाहिए. इस विश्वास के साथ कि ये अब लाइफ में रिपीट नहीं होगी. पत्रकार क्यों बनना चाहते हो, ये सवाल तो पक्का होगा. प्लेसमेंट तक के लिए एक ढंग का जवाब सोच लीजिएगा. जवाब पूछने वाले के हिसाब से बदला भी जा सकता है. शर्तें लागू.

बस तो क्या है. लिखित परीक्षा तो क्वालीफाई कर ही ली है. इसी विश्वास के साथ घुस जाइए इंटरव्यू रूम में. उम्मीद और दुआ है कि अगर आप में लगन और क्षमता है तो जल्दी ही आईआईएमसी में मुलाकात हो. जब मुलाकात हो तो सर ना बोलना. बुजुर्ग टाइप का फील होता है. तब तक के लिए गुड लक फ्यूचर आईआईएमसिएन. आईआईएमसी आपका हो.

शुभकामनाएं.

Thursday, June 26, 2014

एक्सप्रेस पढ़ते हो, टाइम्स, जागरण या हिन्दू क्यों नहीं ?

शुभम गुप्ता | स्नातक की पढ़ाई किरोरीमल कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय से. उसके बाद पत्रकारिता में रुचि के चलते भारतीय जनसंचार संस्थान में रेडियो एवं टेलीविज़न पत्रकारिता (2013-2014) विभाग से डिप्लोमा. कैंपस प्लेसमेंट से समाचार चैनल न्यूज़ एक्सप्रेस में.


लिखित परीक्षा में पास होने के लिए बधाइयाँ. आपकी मेहनत रंग लायी है.  अब साक्षात्कार की सीढ़ी पार करना आवश्यक है. साक्षात्कार की तारीखें आपको मिल चुकी होंगी और आप सभी इसमें सफल होने के लिए पूरी कोशिश कर रहे होंगे. कहीं आपने समाचार-पत्र पढ़ना बंद तो नहीं किया? करिएगा भी मत. साक्षात्कार की तैयारी करते समय कई बातों का ध्यान रखना होता है. आप को आस-पास और दुनिया के बारे में बढ़िया जानकारी होनी चाहिए.

आपके मन में सवाल होगा कि साक्षात्कार कितने समय का होता होगा? तो समय की चिंता करने की जरूरत नहीं है. वैसे साक्षात्कार 15-20 मिनट का होता है. रेडियो-टेलीविज़न विभाग के साक्षात्कार में व्यक्तिगत साक्षात्कार के अलावा पीस टू कैमरा यानि कैमरे के सामने 25-30 सेकेंड बोलना होता है.

साक्षात्कार के समय आपको कई तरह के सवालों का सामना कर पड़ सकता है. मान लीजिये, आपसे पूछा जाए कि आप कौन सा अखबार पढ़ते हैं और आपने जवाब दिया कि मैं फलां-फलां अखबार पढ़ता हूँ. मानिए कि आपने कहा कि मैं इंडियन एक्सप्रेस पढ़ता हूँ. तो आपको इंडियन एक्सप्रेस के बारे में सब कुछ पता होना चाहिए. जैसे इंडियन एक्सप्रेस के संपादक कौन हैं? आपको इंडियन एक्सप्रेस ही क्यों पसंद है? क्या टाइम्स ऑफ इंडिया, दैनिक जागरण, द हिन्दू अच्छा नहीं लगता? नहीं तो क्यों? मतलब ये है कि आपको जो पसंद है, उसके बारे में ठीक-ठाक जानकारी होनी चाहिए, वजह होनी चाहिए. ये भी पूछ लेते हैं कि अगर इंडियन एक्सप्रेस पढ़ते हो तो बताओ कि एक्सप्रेस की आज की हेडलाइन क्या है या ये कि संपादकीय पेज पर कौन-कौन से लेख हैं?

सवाल कि आप कहाँ से हैं? आपने कहा कि कानपुर से हूँ. तो आपको कानपुर के उद्योग-धंधे, गंगा में बढ़ते औद्योगिक कचरे, कानपुर की मुख्य समस्याओं, वहां की राजनीति आदि के बारे में बता होना चाहिए.

एक और महत्वपूर्ण बात. इंटरव्यू में आप अपनी बातों से साक्षात्कार को आगे बढ़ाते हैं. आप जैसा बताएँगे, वे वैसे ही सवाल पूछते रहेंगे. यदि आपको किसी सवाल का जवाब नहीं पता या आपको संशय है तो गलत जवाब न दें. कह दीजिये कि मुझे नहीं पता.

आपकी पढ़ाई का बैकग्राउंड क्या है? आप कहाँ से पढ़ कर आए हो? उस कॉलेज और यूनिवर्सिटी का इतिहास क्या है?  ये सब पता होनी चाहिए. आपने जो कोर्स किया है? उसमें जो आपके विषय थे, इनके बारे में पता होना चाहिए. उदाहरण के लिए. अगर आप राजनीति विज्ञान से स्नातक हैं तो आपसे पूछा जा सकता है कि कौन सा विचारक आपको ज्यादा प्रभावित करता है? क्यों करता है? अगर आप सेंट स्टीफेंस से पढ़ कर आए हैं तो आपको पता होना चाहिए कि सेंट स्टेफेंस पहले कश्मीरी गेट इलाके में था और बाद में नॉर्थ कैंपस शिफ्ट हुआ.

साक्षात्कार के समय आपका आत्मविश्वास देखा जाता है. आपसे हाल में घटित घटनाओं के बारे मेँ पूछा जा सकता है. आम चुनाव, नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण में पड़ोसी देशों का आना, बीजेपी में अमित शाह की संभावित ताजपोशी, बिहार में नेतृत्व परिवर्तन, व्यापम घोटाला, साईं विवाद, इराक संकट, चीन से संबंध, फुटबॉल विश्वकप ......... ये लिस्ट बड़ी है. माने मतलब ये है कि आप तमाम महत्वपूर्ण खबरों से वाकिफ रहें. किसी घटना का विश्लेषण करना हो तो उसके दोनों पक्षों को रखें.

अखबार-पत्रिकाएं पढ़िए और टेंशन मुक्त होकर साक्षात्कार देने जाइए.

बहुत-बहुत शुभकामनायें.